मुंबई: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस की कारारी हार और बीजेपी की जीत की खूब चर्चा हो रही है। जहां राजनीतिक मामलों के जानकार बीजेपी की चुनावी रणनीति को इस जीत की मुख्य वजह बताया जा रहा है वहीं ममता क्यों हारीं इसकी भी वजहें गिनाई जा रही हैं। इस बीच शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने मंगलवार को कहा कि पश्चिम बंगाल की निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की बात नहीं सुनकर और उनसे गठबंधन के संबंध में वार्ता ना करके 'बड़ी गलती' की, वर्ना विधानसभा चुनाव के नतीजे कुछ और होते।
Related Stories
एसआईआर के जरिए लाखों वोटर्स के नाम हटाए-राउत
बीजेपी 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 207 सीटें जीतकर निर्णायक बहुमत हासिल किया और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 15 साल के शासन का अंत हो गया। ममता बनर्जी भवानीपुर सीट पर बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी के हाथों पराजय का सामना करना पड़ा। मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए राउत ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत लोकतंत्र की जीत नहीं है, क्योंकि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के माध्यम से लाखों मतदाताओं के नाम हटा दिए गए।
भविषय में बीजेपी को भी हार का सामना करना पड़ेगा-राउत
शिवसेना (UBT) प्रवक्ता ने कहा कि विधानसभा चुनाव में बनर्जी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के.स्टालिन जैसे प्रमुख विपक्षी नेताओं की हार के बावजूद, विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' का भविष्य उज्ज्वल है। उन्होंने कहा, ''लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष गांधी ने जो कुछ भी कहा था (पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के चुनावों में धांधली के बारे में), वह सच साबित हुआ। वह एक दूरदर्शी नेता हैं।'' उन्होंने यह भी कहा कि इंदिरा गांधी ने भी एक समय अधिकांश राज्यों में जीत हासिल की थी, फिर भी उन्हें बाद में करारी हार का सामना करना पड़ा। राउत ने कहा कि भाजपा भी इस समय शिखर पर है और भविष्य में उसे भी हार का सामना करना पड़ेगा।
जनादेश नहीं बल्कि एक साजिश-ममता
इस बीच ममता बनर्जी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार किया और आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का परिणाम "जनादेश नहीं बल्कि एक साजिश" है। साथ ही उन्होंने सड़कों पर उतरकर लड़ाई लड़ने और विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन को मजबूत करने का संकल्प लिया। ममता बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस ने बीजेपी के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ा, बल्कि उसकी लड़ाई चुनाव आयोग से थी।